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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' धर्म का अभिप्राय ''

धर्म का अभिप्राय पूजा पद्धति नहीं, 
अपितु पूर्ण कर्तव्‍यपूर्ति है ... !!!

- राजा राममोहन राय 

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर और अनुकरणीय विचार हैं ..

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  3. क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  4. धर्म
    ऊंचे आसनों पर बैठ,
    सारे ताम झाम के साथ
    वो बताते है
    धर्म क्या है ?
    मेरे खुदा ने
    इतना ही बताया
    बन्दों से प्यार करो ,
    खुशियों मैं साथ रहो,
    दर्द का हिस्सा बनो,
    यही धर्म है
    यही धर्म है

    09-08-2010

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  5. कर्मकांड धर्म का अंग नहीं है। कर्तव्यरत रहना ही धर्म है।
    बहुत ही सुंदर।

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यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'