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शनिवार, 31 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' जैसा कर्म ''

सारा विश्‍व कर्मों की प्रधानता पर आधारित है, 
जो जैसा कर्म करता है, वैसा ही परिणामस्‍वरूप 
फल पाता है ............। 

- रामचरित मानस 

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' अनुशासित ''

जो अनुशासित नहीं है वही आश्‍वासन देता है, 
जो अनुशासित होता है, वह क्रियान्वित होता है .... 

- अज्ञात

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' साहस का संचार ''

विश्‍व में आधे से अधिक लोग तो इसलिए असफल हो जाते हैं कि
समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे भयभीत हो उठते हैं .

- स्‍वामी विवेकानन्‍द

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' धर्म का अभिप्राय ''

धर्म का अभिप्राय पूजा पद्धति नहीं, 
अपितु पूर्ण कर्तव्‍यपूर्ति है ... !!!

- राजा राममोहन राय 

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' समान रूप से ''

चरित्र और शैक्षणिक सुविधाएं ही वह पूंजी हैं, 
जो माता-पिता अपनी संतान में समान रूप से 
स्‍थानांतरित कर सकते हैं ... !

-- महात्‍मा गांधी

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' प्रेम का प्रभाव ''

प्रेम का प्रभाव और अनुभूति अद्भुत होती है, 
प्रेम का स्‍पर्श पाते ही सब कवि बन जाते हैं ..!!

- प्‍लेटो

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' अनुभव ''

जैसे दीपक का प्रकाश घने अंधकार के बाद दिखाई देता है, 
उसी प्रकार सुख का अनुभव भी दु:ख के बाद ही होता है ... !!

- शूद्रक 

मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' बैर के कारण ''

बैर के कारण उत्‍पन्‍न होने वाली आग,
एक पक्ष को स्‍वाहा किए बिना कभी शांत नहीं होती .. 

- वेद व्‍यास

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' अनुगमन ''

यदि तुम्‍‍हें अपने चुने हुए रास्‍ते पर विश्‍वास है, 
यदि इस पर चलने का साहस है, यदि इसकी 
कठिनाइयों  को जीत लेने की शक्ति है, तो रास्‍ता 
तुम्‍हारा अनुगमन करता है .....!!

- धीरूभाई अंबानी

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' कोई भी ''

हर कोई दुनिया बदलने की सोचता है लेकिन 
कोई भी अपने आपको बदलने की नहीं सोचता ... !!!

- लियो टॉलस्‍टाय 

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' प्रेम -शक्ति - साहस ''

दूसरा अत्‍यधिक प्रेम करे तो आपको शक्ति मिलती है, 
आप दूसरे को अत्‍यधिक प्रेम करें तो आपको साहस मिलता है ... !!!

- डब्‍ल्‍यू सोमरेट मोघम

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' नहीं परख पाते ''

लोगों के विवेक की आंखे फूट गई हैं वे संत-असंत नहीं परख पाते, 
जिनके साथ में दस - बीस साधु वेषधारी या मनुष्‍य हो गये,
उन्‍हीं का नाम महन्‍त हो गया .... । 

- कबीरदास जी

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' बड़प्‍पन ''

मनुष्‍य का बड़प्‍पन धन-संपत्ति में नहीं बल्कि 
सबके हित में कार्य करने में छिपा होता है ... ।

- महात्‍मा गांधी

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' सच कहते हैं ''

यदि आप सच कहते हैं तो आपको 
कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती ... 

-मार्क ट्वेन 

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

आज का सद़विचार '' प्रेम ''

आप किसी से इसलिए प्रेम नहीं करते, 
क्‍योंकि वे खूबसूरत हैं बल्कि वे खूबसूरत हैं, 
क्‍योंकि आप उनसे प्रेम करते हैं .... । 

-अज्ञात

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' मजाक बनता है ''

पहले हर अच्‍छी बात का मजाक बनता है, 
फिर उसका विरोध होता है ... 
और फिर उसे  स्‍वीकार कर लिया जाता है  ... । 


- स्‍वामी विवेकानन्‍द 

सोमवार, 28 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' अनुभव से खाली ''

जो बिना ठोकर खाए मंजिल तक पहुंच जाते हैं 
उनके हाथ अनुभव से खाली रह जाते हैं ...... 

- शेक्‍सपियर 





शनिवार, 26 नवंबर 2011

आज का सद़विचार ''कितना क्रोध उचित है''

सच में हर ज्ञानी,महापुरुष ने सदा एक ही बात कही है
क्रोध नहीं करना चाहिए .
ग्रन्थ साक्षी हैं ,देवताओं से लेकर महा पुरुष,योगी और महा ऋषी भी क्रोध से नहीं बच सके .
क्रोध मनुष्य के स्वभाव का अभिन्न अंग है.
परमात्मा द्वारा दी हुयी इस भावना का अर्थ असहमती की अभिव्यक्ति ही तो है
पर उस में विवेक खोना ,जिह्वा एवं स्वयं पर से नियंत्रण खोना घातक होता है.
इसकी परिणीति अनयंत्रित व्यवहार और कार्य में होती है .जिस से बहुत भारी अनर्थ हो सकता है ,सब को निरंतर ऐसा होते दिखता भी है.
अतः क्रोध करना अनुचित तो है ही ,पर साथ में क्रोध आने पर,अपना विवेक बनाए रखना,जिह्वा और मन मष्तिष्क पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है.
असहमती अवश्य प्रकट करनी चाहिए पर विवेक पूर्ण तरीके से
डा.राजेंद्र तेला "निरंतर"

आज का सद़विचार 'ब्‍लॉग जगत ' से 

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' स्‍वस्‍थ''

मन स्‍वस्‍थ होगा तो शरीर भी स्‍वस्‍थ होगा ... !!

 - हंसराज सुज्ञ
आज का सद़विचार '' ब्‍लॉग जगत से ''

बुधवार, 23 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' अपनी भूल ''

अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए तो यह
उससे कहीं अच्‍छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे ...

- प्रेमचंद

सोमवार, 21 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' करूणा से पानी ''

युवावस्‍था आवेशमय होती है, वह ...
क्रोध से आग हो जाती है और करूणा से पानी ....!

-प्रेमचंद 

शनिवार, 19 नवंबर 2011

आत्‍मा बुद्धि से महान है ....!!!

मस्तिष्‍क इन्द्रियों की अपेक्षा महान है, 
शुद्ध बुद्धिमता मस्तिष्‍क से महान है, 
आत्‍मा बुद्धि से महान है .... 
और आत्‍मा से बढ़कर कुछ भी नहीं है !!!

-स्‍वामी शिवानन्‍द

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' हम एक दूसरे के हैं ''

यदि हमारे मन में शांति नहीं है तो इसकी वजह है, 
कि हम यह भूल चुके हैं कि हम एक दूसरे के हैं ...। 

 - मदर टेरेसा 

बुधवार, 16 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' अपने निशान ''

वहां मत जाइए जहां रास्‍ता ले जाए, 
बल्कि वहां जाइए जहां कोई रास्‍ता 
नहीं जाता है, वहां अपने निशान छोड़ जाइए ....। 

- राल्‍फ वाल्‍डो इमर्सन

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' झूठे शब्‍द ''

झूठे शब्‍द सिर्फ खुद में बुरे नहीं होते, 
बल्कि वे आपकी आत्‍मा को भी बुराई 
से संक्रमित कर देते हैं .... 

- सुकरात 

सोमवार, 14 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' समय की चिंता ''

हम समय की चिंता करते हैं 
समय हमारी चिंता नहीं करता । 

- डा.राजेंद्र तेला,"निरंतर"  
 
आज का सद़विचार '' ब्‍लॉगजगत से '' 

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' अशुभ विचारो को ''

घर के कूड़े की तरह, 
अशुभ विचारों को बाहर फेंक देना चाहिए ...। 

- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार '' ब्‍लॉग जगत से ''

बुधवार, 9 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' रूई से हल्‍का याचक ''

तृण से हल्‍की रूई होती है और रूई से हल्‍का याचक, 
हवा इस डर से उसे नहीं उड़ाती कि कहीं उससे भी 
कुछ न मांग ले .........। 

- चाणक्‍य

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' सीख लेना ''

सफलता की खुशी मनाना अच्‍छा है, पर 
सबसे जरूरी है अपनी असफलता से सीख लेना .... । 
 - बिल गेट्स

शनिवार, 5 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' अच्‍छे गुण ''

धन से अच्‍छे गुण नहीं मिलते, 
धन अच्‍छे गुणों से मिलता है !

- सुकरात


गुरुवार, 3 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' प्रबल होने पर ''

अग्नि क्‍या नहीं जला सकती ? समुद्र कौन सी वस्‍तु नहीं डुबा सकता ?
प्रबल होने पर अबला कहलाने वाली स्‍त्री क्‍या नहीं कर सकती ? 
और काल जगत में किसे नहीं खा सकता ..... ?

- तुलसीदास जी




बुधवार, 2 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' कितना क्रोध उचित है ''

सच में हर ज्ञानी,महापुरुष ने सदा एक ही बात कही है
क्रोध नहीं करना चाहिए .
ग्रन्थ साक्षी हैं ,देवताओं से लेकर महा पुरुष,योगी और महा ऋषी भी क्रोध से नहीं बच सके .
क्रोध मनुष्य के स्वभाव का अभिन्न अंग है.
परमात्मा द्वारा दी हुयी इस भावना का अर्थ असहमती की अभिव्यक्ति ही तो है
पर उस में विवेक खोना ,जिह्वा एवं स्वयं पर से नियंत्रण खोना घातक होता है.
इसकी परिणीति अनयंत्रित व्यवहार और कार्य में होती है .जिस से बहुत भारी अनर्थ हो सकता है ,सब को निरंतर ऐसा होते दिखता भी है.
अतः क्रोध करना अनुचित तो है ही ,पर साथ में क्रोध आने पर,अपना विवेक बनाए रखना,जिह्वा और मन मष्तिष्क पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है.
असहमती अवश्य प्रकट करनी चाहिए पर विवेक पूर्ण तरीके से .
डा.राजेंद्र तेला "निरंतर"

 ... आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से...

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

आज का सद़विचार '' सच्‍चा ज्ञान ''

सच्‍चा ज्ञान वही होता है 
जो जीवन में जीवंत हो उठे ....। 

- हंसराज सुज्ञ

... आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ...

सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

क्रोध को प्रेम से, पाप को पुण्‍य से, लोभ को दान से 
और असत्‍य को सत्‍य से जीत लो .............. 

- महात्‍मा बुद्ध

शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' भातृभाव का अस्तित्‍व ''

भातृभाव का अस्तित्‍व केवल आत्‍मा में और आत्‍मा के द्वारा
ही होता है, यह और किसी के सहारे टिक ही नहीं सकता ... । 

- श्री अरविंद 

सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार ' पूजा - अर्चना '

संसार का सृजन करने वाले  एवं उसे चलाने वाले परमात्मा को भिन्न नामों से पुकारा जाता है अपनी अपनी आस्था और धर्म के अनुसार  राम ,कृष्ण,शिव,जीसस क्राइस्ट,पैगम्बर मोहम्मद,गुरु नानक,गौतम बुद्ध ,महावीर ,जोराष्ट्र ,भिन्न भिन्न सम्प्रादायों के गुरुओं आदि के नामों से धर्मावलम्बी उन्हें याद करते उनका नमन व् अपने धार्मिक मूल्यों एवं आस्था के अनुसार पूजा करते हैं.सम्मान प्रकट करते हैं
पर पूजा,अर्चना अर्थ हीन हो जाती है अगर हम उनके बताये रास्ते पर नहीं चलते .
हमारे कार्य कलापों एवं व्यवहार में उनके द्वारा दी गयी शिक्षा अगर परिलक्षित नहीं होती हो तो ये अधर्म कहलायेगा  
अपने ईश या इष्ट को प्रसन्न करने के लिए पूजा ,अर्चना से अधिक आवश्यक है,उनके द्वारा स्थापित मूल्यों एवं सत्य मार्ग पर चलना .
अन्यथा पूजा,म्रत्यु और अनहोनी से बचने के लिए  उन्हें याद करने से अधिक नहीं होती है.
मात्र दिखावा भर रह जाती है और स्वयं को धोखा देने के सामान होती है
संसार का सृजन करने वाले एवं उसे चलाने वाला परमात्मा अगर है ,तो ध्यान रहना चाहिए वो सब देखता है
ऐसा कार्य या व्यवहार जो उसे मान्य नहीं है ,उसकी दृष्टि से छुपा नहीं रहता


आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ... 


शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' एक ही उपाय ''

दुनिया में प्रसन्‍न रहने का एक ही उपाय है, 
वह यह कि हम अपनी जरूरतें कम कर लें ... 

- महात्‍मा गांधी









सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' हितकर ''

प्रिय होने पर भी जो हितकर न हो, उसे न कहें
हितकर कहना ही अच्‍छा है, चाहे वह अत्‍यंत अप्रिय हो ...

- विष्‍णु पुराण

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' नम्रता में वृद्धि''

ज्ञान बढ़ने के साथ ही अहंकार घटना चाहिए,
और नम्रता में वृद्धि होनी चाहिए .... !!!


- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉगजगत से .....


गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' ज्ञान से ही पूर्णता ''

श्रद्धावान व्‍यक्ति को ही ज्ञान प्राप्‍त होता है,
ज्ञान में परम शांति छिपी हुई है ज्ञान से ही
व्‍यक्ति पूर्ण होता है ........।

- गीता

मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' मौन ''

पुरूषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है,
जप से पाप दूर होता है मौन से
कलह की उत्‍पत्ति नहीं होती और
सजगता से भय नहीं होता ....


- चाणक्‍य

सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' बुरा काम ''

दुनिया उनकी वजह से बरबाद नहीं होगी जो बुरा काम
करते हैं, वह तो उनकी वजह से बरबाद होगी जो उन्‍हें
ऐसा करते हुए देखते हैं और कुछ करते नहीं ... ।

- अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' पारस पत्‍थर ''

अगर तुम जितना पाते हो उससे कम खर्च करते हो,
तो तुम्‍हारे पास पारस पत्‍थर है ...........
!!!

- बेंजामिन फ्रेंकलिन

बुधवार, 5 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' दो मूल विकल्‍प ''

जीवन में दो मूल विकल्‍प होते हैं स्थितियों को
उसी रूप में स्‍वीकार करना जैसी वे हैं, या उन्‍हें
बदलने का उत्‍तरदायित्‍व स्‍वीकार करना ।

- डेनिस वेटले

मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार ''प्रेम करने वाला ''

प्रेम करने वाला व्‍यक्ति कभी भी उद्दंड,
अत्‍याचारी और स्‍वार्थी नहीं होता .... ।

- महात्‍मा गांधी

शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

आज का सद़विचार ''अवसर''

अवसर आने पर मनुष्‍य यदि कौड़ी (दाम) देने में
चूक जाये जो तो फिर लाख रूपया देने से क्‍या होता है ?
द्वितीया के चंद्रमा को न देखा जाए फिर पक्ष भर चंद्रमा
उदय रहे, उससे क्‍या होगा ?


- तुलसीदास

बुधवार, 28 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' नम्रता में वृद्धि ''

ज्ञान बढ़ने के साथ ही अहंकार घटना चाहिए,
और नम्रता में वृद्धि होनी चाहिए ..... !!!


- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉगजगत से ....

सोमवार, 26 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' कमाया हुआ धन ''

जो वर्तमान में कमाया हुआ धन जोड़ता नहीं,
उसे भविष्‍य में पछताना पड़ता है .....।

- चाणक्‍य

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' बड़ी बातें ''

छोटी-छोटी बातों का आनंद उठाइए क्‍योंकि
हो सकता है कि किसी दिन आप मुड़ कर देखें
तो आपको अनुभव हो कि ये तो बड़ी बातें थीं


- राबर्ट ब्राइट

बुधवार, 21 सितंबर 2011

आज का सद़विचार ''नैतिक पहलू ''

जीवन की दुर्घटनाओं में अक्‍सर बड़े महत्‍व के
नैतिक पहलू छिपे हुए होते हैं .......!!!

- प्रेमचंद

सोमवार, 19 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' विवेक द्वारा ''

कर्म को सचेत होकर और सोच समझकर विवेक
द्वारा करना चाहिए अन्‍यथा हानि होती है .... !!!

- महात्‍मा गांधी

शनिवार, 17 सितंबर 2011

आज का सद़विचार ' हिंदी हमारी मातृभाषा है'

हिंदी हमारी मातृभाषा है, हमारा गर्व है
क्या करें - दूर के ढोल सुहाने लगते हैं
और उस ढोल पर चाल (स्टाइल) बदल जाती है ...!!!

- रश्मि प्रभा

... आज का सद़विचार ब्‍लॉगजगत से ....

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' तर्क ''

तर्क से किसी निष्‍कर्ष पर नहीं
पहुंचा जा सकता, मूर्ख लोग तर्क
करते हैं, जबकि बुद्धिमान विचार करते हैं ....।


- श्री परमहंस योगानंद

बुधवार, 14 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' अपनी शक्ति खुद ''

कोई तुम्हारे काँधे पर हाथ रखता है तो तुम्हारा हौसला बढ़ता है
पर जब किसी का हाथ काँधे पर नहीं होता ...
तुम अपनी शक्ति खुद बन जाते हो
और वही शक्ति ईश्वर है ....!!!!

- रश्मि प्रभा

आज का सद़विचार ब्‍लॉगजगत से ....

सोमवार, 12 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' विनयहीन ''

विनयहीन ज्ञानी वस्‍तुत: ज्ञानी ही नहीं है .... !!!

- हंसराज सुज्ञ
आज का सद़विचार ब्‍लॉगजगत से ...

शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' वाणी ''

वाणी मधुर हो तो सब कुछ वश में हो
जाता है, अन्‍यथा सब शत्रु बन जाते हैं ... ।


- शेख सादी

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' आचरण ''

केवल ज्ञान की कथनी से क्‍या होता है, आचरण में,
स्थिरता नहीं है, जैसे कागज का महल देखते ही गिर
पड़ता है, वैसे आचरण रहित मनुष्‍य शीघ्र पतित होता है ।
- कबीर

बुधवार, 7 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' सच बोलकर ''

लोभी को धन से, अभिमानी को विनम्रता से,
मूर्ख को मनोरथ पूरा कर के और पंडित को
सच बोलकर वश में किया जाता है ...... ।


- हितोपदेश

सोमवार, 5 सितंबर 2011

आज का सद़विचार '' उचित विकास ''

जिस तरह फूल पौधों के उचित विकास के लिए
समय समय पर काट छांट ज़रूरी है....
ठीक उसी तरह बच्चों को उचित बात सिखाने के लिए ...
समय समय पर डांट ज़रूरी है......!!!!

- रश्मि प्रभा

आज का विचार ब्‍लॉग जगत से ....

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

आज का सद़विचार 'वश'

जिसने अपने को वश में कर लिया है,
उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं
बदल सकते .....


- भगवान बुद्ध

सोमवार, 29 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' प्रेम का पात्र ''''

नमस्‍कार करने वाला व्‍यक्ति विनम्रता को
ग्रहण करता है और समाज में सभी के
प्रेम का पात्र बन जाता है ....।

- प्रेमचंद

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' धर्म का मूल ''

विनय धर्म का मूल है अत: विनय आने पर,
अन्‍य गुणों की सहज ही प्राप्ति हो जाती है .... ।


- हंसराज सुज्ञ


आज का विचार ब्‍लॉग जगत से ....

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' जीत और आदर्श ''

यह मत मानिए की जीत ही सब कुछ है अधिक महत्‍व
इस बात का है कि आप किसी आदर्श के लिए संघर्षरत हों, 
यदि आप किसी आदर्श पर डट नहीं सकते तो जीतेंगे क्‍या .... ?

- लेन कर्कलैंड

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

स्वतंत्रता ....

तुम स्वतंत्र होना चाहते तो हो
पर स्वतंत्रता देना नहीं चाहते ....!!!

- रश्मि प्रभा

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ..............

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' विचारों की शुद्धि''

देह शुद्धि से अधिक,
विचारों की शुद्धि आवश्‍यक है ...।

- हंसराज सुज्ञ

आज का विचार ब्‍लॉग जगत से ....

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' जीविका ''

वही पुत्र है जो पितृभक्‍त है, वही पिता है जो ठीक से
पालन करता है, वही मित्र है जिस पर भरोसा किया
जा सके और वही देश है जहां जीविका हो ... ।

- चाणक्‍य

सोमवार, 8 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' जीवन का रहस्‍य ''

जीवन का रहस्‍य भोग में स्थित नहीं है,
यह केवल अनुभव द्वारा निरंतर सीखने
से ही प्राप्‍त होता है ...... ।

- विवेकानन्‍द

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' अभिमान का आश्रय ''

यदि कोई हमारा एक बार अपमान करे,हम दुबारा उसकी शरण में नहीं जाते। और यह मान (ईगो) प्रलोभन हमारा बार बार अपमान करवाता है। हम अभिमान का आश्रय त्याग क्यों नहीं देते ...?


- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉगजगत से ....

बुधवार, 3 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' तस्‍वीर का दूसरा पहलू ''

निरंतर सफलता हमें संसार का केवल एक ही
पहलू दिखाती है, विपत्ति हमें तस्‍वीर का दूसरा
पहलू भी दिखाती है ...........।


- कोल्‍टन

सोमवार, 1 अगस्त 2011

आज का सद़विचार '' दो मूल विकल्‍प ''''

जीवन में दो मूल विकल्‍प होते हैं, स्थितियों को
उसी रूप में स्‍वीकार करना जैसी वे हैं या उन्‍हें,
बदलने का उत्‍तरदायित्‍व स्‍वीकार करना ..... ।


- डेनिस वेटले

शनिवार, 30 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' लोभ ''

यदि कोई एक बार हमारे साथ धोखा करे हम उससे मुँह मोड़ लेते है। और हमारा यह लोभ हमें बार बार धोखा देता है, हम अपने लोभ का मुख नोच क्यों नहीं लेते?

- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से .....

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' क्‍यों नहीं ''

आप कुछ देखते हैं तो कहते हैं 'क्‍यों'
लेकिन मैं असंभव से सपने देखता हूं
और कहता हूं .... 'क्‍यों नहीं'


- जॉर्ज बर्नाड शॉ

बुधवार, 27 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' कहानी कितनी सार्थक है ''

जीवन एक कहानी है, महत्‍व इस बात का नहीं,
यह कहानी कितनी लम्‍बी है, महत्‍व इस बात का है,
कि कहानी कितनी सार्थक है.......।

- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ........

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' तैरने वाले ''

यह सच है कि पानी में तैरने वाले ही डूबते हैं,
किनारे पर खड़े रहने वाले नहीं, मगर किनारे
पर खड़े रहने वाले कभी तैरना भी नहीं सीख पाते ... ।


- वल्‍लभ भाई पटेल

सोमवार, 25 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' आत्‍म के सन्‍दर्भ में ''

शरीर के मामले में जो स्‍थान साबुन का है,
वही आत्‍मा के सन्‍दर्भ में आंसू का है ..... ।

- अज्ञात

शनिवार, 23 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' अपने दोष ''

दूसरों के दोष देखने और ढूंढने की तीव्रेच्‍छा,
इतनी गाढ़ हो जाती है कि अपने दोष देखने
का वक्‍त ही नहीं मिलता .......

- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ...............





शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' विनाश कुछ ही पलों में ''

प्रकृति का तमाशा भी खूब है,
सृजन में समय लगता है ...
जबकि विनाश कुछ ही पलों में हो जाता है ....।


- जकिया जुबैरी

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' बेहतर जिंदगी ''

बेहतर जिंदगी का रास्ता
बेहतर किताबों से होकर जाता है ....।।

- शिल्‍पायन

मंगलवार, 19 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' सच्‍चा सुधारक ''

सच्चा सुधारक वही है ......
जो पहले अपना सुधार करता है।


- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से .....

सोमवार, 18 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' सिद्धि ''

अच्‍छे कामों की सिद्धि में बड़ी देर लगती है,
पर बुरे कामों की सिद्धि में यह बात नहीं .... ।

- प्रेमचंद

शनिवार, 16 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' पतन का मार्ग ''

पतन का मार्ग ढलान का मार्ग है,

ढलान में ही हमें रूकना सम्‍हलना होता है ...।

- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ....

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' कहने के लिये ''

लिखना तब काफी आसान हो जाता है,
यदि आपके पास कहने के लिये बहुत कुछ हो .... ।

- शोलम आस्‍च

गुरुवार, 14 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' अच्‍छी किताब ''

अच्‍छी किताब एक जादुई कालीन की तरह है,
जो आहिस्‍ते से हमें उस दुनिया की सैर कराती है
जहां दूसरी किसी चीज के जरिए प्रवेश संभव नहीं है ...।


- कैरोलीन गार्डोन

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' स्‍वभाव ''

परिस्थिति प्रतिकूल देखकर अपना अच्छा भला स्वभाव
बदल देना तो स्वेच्छा बरबाद हो जाने के समान है।


- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से .....

सोमवार, 11 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' किताबें ''''

किताबें समय के महासागर में,
जलदीप की तरह रास्‍ता दिखाती हैं ...


- अज्ञात

बुधवार, 6 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' क्षमता ''

उत्तम वस्तु को पचाने की
क्षमता भी उत्तम चाहिए।

- हंसराज सुज्ञ
आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ....

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' आज की याद ''

बीता कल आज की याद है, और
आने वाला कल आज का स्‍वप्‍न ...।


- खलील जिब्रान

सोमवार, 4 जुलाई 2011

आज का सद़विचार '' बीज ''

खेत और बीज उत्‍तम हो तो भी, किसानों के बोने में मुट्ठी के
अंतर से बीज कहीं ज्‍यादा कहीं कम पड़ते हैं, इसी प्रकार शिष्‍य
उत्‍तम होने पर भी गुरूओं की भिन्‍न-भिन्‍न शैली होने पर भी
शिष्‍यों को कम ज्ञान हुआ तो इसमें शिष्‍यों का क्‍या दोष ...।


- संत कबीर

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

आज का सद़विचार ' वर्तमान को सार्थक '

जो समय गया सो गया, उसके लिए पश्चाताप करने की

अपेक्षा वर्तमान को सार्थक करने की जरूरत है .... ।

- हंसराज सुज्ञ


आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ....

गुरुवार, 30 जून 2011

आज का सद़विचार '' सफलता का राज ''

अगर सफलता का कोई राज है तो वह
दूसरे के दृष्टिकोण को समझने और चीजों को
उसके दृष्टिकोण जितने अच्‍छे से देख पाने की
क्षमता में निहित है .... ।

- हेनरी फोर्ड

बुधवार, 29 जून 2011

आज का सद़विचार '' प्रशंसा ''

प्रशंसा सब को अच्छी लगती है,शायद ही कोई होगा जिसे प्रशंसा सुनना अच्छा नहीं लगता है, प्रशंसा आवश्यक है ,अच्छे कार्य की प्रशंसा नहीं करना अनुचित है पर ये कतई आवश्यक नहीं है, कि अच्छा करने पर ही प्रशंसा की जाए, प्रोत्साहन के लिए साधारण कार्य की प्रशंसा भी कई बार बेहतर करने को प्रेरित करती है,पर देखा गया है लोग झूंठी प्रशंसा भी करते हैं ,खुश करने के लिए या कडवे सत्य से बचने के लिए या दिखावे के लिए .पर इसके परिणाम घातक हो सकते हैं .व्यक्ति सत्य से दूर जा सकता है,एवं वह अति आत्मविश्वाश और भ्रम का शिकार हो सकता है, जो घातक सिद्ध हो सकता है.वास्तविक स्पर्धा में वह पीछे रह सकता है या असफल हो सकता है इसलिए प्रशंसा कब और कितनी करी जाए,यह जानना भी आवश्यक है.साथ ही झूंठी प्रशंसा को पहचानना भी आवश्यक है .इसलिए सहज भाव से संयमित प्रशंसा करें, और सुनें ,प्रशंसा से अती आत्मविश्वाश से ग्रसित होने से बचें.प्रशंसा करने में कंजूसी भी नहीं बरतें .

- डा.राजेंद्र तेला,"निरंतर"

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ....

मंगलवार, 28 जून 2011

आज का सद़विचार '' परिवेश ''

साधारण मानव परिवेश अनुसार ढलता है,
असाधारण मानव परिवेश को ही ढालता है।


- हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ......

सोमवार, 27 जून 2011

आज का सद़विचार '' दंड ''

प्रसिद्ध होने का यह एक दंड है कि मनुष्‍य को
निरंतर उन्‍नतिशील बने रहना पड़ता है .... ।

- अज्ञात

शुक्रवार, 24 जून 2011

आज का सद़विचार '' मधुर व्‍यवहार ''''

दूसरों का दिल जीतने के लिए
फटकार नहीं मधुर व्यवहार चाहिए।


हंसराज सुज्ञ

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ...

गुरुवार, 23 जून 2011

आज का सद़विचार '' विपत्ती और सब्र ''

विपत्ती के समय में इंसान विवेक खो देता है ,

स्वभाव में क्रोध और चिडचिडापन आ जाता है.

बेसब्री में

सही निर्णय लेना व् उचित व्यवहार असंभव हो जाता है.

लोग व्यवहार से खिन्न होते हैं ,नहीं चाहते हुए भी

समस्याएं सुलझने की बजाए उलझ जाती हैं

जिस तरह मिट्टी युक्त गन्दला पानी

अगर बर्तन में कुछ देर रखा जाए तो

मिट्टी और गंद पैंदे में नीचे बैठ जाती है ,

उसी तरह विपत्ती के समय शांत रहने और सब्र रखने में ही भलाई है.

धीरे धीरे समस्याएं सुलझने लगेंगी

एक शांत मष्तिष्क ही सही फैसले आर उचित व्यवहार कर सकता है.


- डा.राजेंद्र तेला," निरंतर ''

आज का सद़विचार ब्‍लॉग जगत से ...