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बुधवार, 6 अक्तूबर 2010

आज का सद़विचार '' अध्‍ययन ''

आज अध्‍ययन करना सब जानते हैं,
पर क्‍या अध्‍ययन करना चाहिए यह
कोई नहीं जानता ।


- जार्ज बर्नाड शॉ

2 टिप्‍पणियां:

  1. mujhe lagta hai apanee apanee ruchi aur jaroorat ke karan aadmee swayam nishchit karta hai ki vo kya pade...jis disha me use badna hai usee se sambandhit vo padega......aaj to internet ka jamana hai..... guidance kee kamee nahee.......atah ye vichar obsolete ho gaya hai........us samay comp ka zamana nahhee ha........
    anytha na le......

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  2. उत्तम विचार। बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    मध्यकालीन भारत-धार्मिक सहनशीलता का काल (भाग-२), राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

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