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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

आज का सद़विचार '' मूर्ति ''

जो व्‍यक्ति इंसान की बनाई मूर्ति की पूजा करता है,
लेकिन भगवान की बनाई मूर्ति (इंसान) से नफरत
करता है, वह भगवान को कभी प्रिय नहीं हो सकता ....।


- स्‍वामी ज्‍योतिनंद

7 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा है इंसान से प्रेम करना ही ईश्वर से प्रेम करना है ..आपका आभार

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  2. सत्य वचन, भगवान इंसान में ही रहता है!

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  3. ''मैं आह बन किसीकी
    तुझको पुकारता था ..''
    ठीक बात है |जन जन में ही भगवन बसते हैं |

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  4. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (30.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'