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सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

आज का सद़विचार '' हितकर ''

प्रिय होने पर भी जो हितकर न हो, उसे न कहें
हितकर कहना ही अच्‍छा है, चाहे वह अत्‍यंत अप्रिय हो ...

- विष्‍णु पुराण

4 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तम विचार !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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