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बुधवार, 12 सितंबर 2012

आज का सद़विचार '' वाणी में सुई ''

वाणी में सुई भले ही रखो पर उसमें धागा डालकर रखो, 
ताकि सुई केवल छेद ही न करे, आपस में जोड़कर भी रखे ... 

- मुनिश्री तरूण सागर

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाणी अगर एक बार छेद दे,तो फिर कोई धागा गांठ बनने से नहीं रोक सकता। तो या तो ऐसे लोगों की फ़िक्र की जाए जो जल्दी गांठ बना लेते हैं,या फिर इस बात की चिंता ही न की जाए कि सूई कितना चुभो रही है,जैसा कि कई दार्शनिकों-संतों ने किया है।

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