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शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

आज का सद़विचार '' आशा ''

ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए जहां,
न आदर है, न जीविका, न मित्र, न
परिवार और न ही ज्ञान की आशा ।


- विनोबा

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    साहित्यकार-बाबा नागार्जुन, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

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  2. तुलसीदासजी ने भी तो कहा है ’’
    आव नहीं आदर नहीं नैनन नहीं सनेेह
    तुलसी तहां न जाहिये कंचन वरसत मेह

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  3. des chhod jaayen kahan ... kyon na sadvicharon se ise hi achchha bana lein.

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