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शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

आज का सद़विचार '' तीन रत्‍न ''

पृथ्‍वी पर तीन रत्‍न हैं। जल, अन्‍न और
सुभाषित लेकिन अज्ञानी पत्‍थर के
टुकड़े को ही रत्‍न कहते हैं ....।

- कालिदास

11 टिप्‍पणियां:

  1. असली नकली का भेद करना दुनिया को आता ही नहीं, सुंदर विचार !

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  2. अच्छा विचार है।

    पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलं अन्नं सुभाषितम्।
    मूढ़ैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा प्रदीयते॥२॥

    पृथ्वी में तीन रत्न हैं - जल, अन्न और सुभाषित, किन्तु मूर्ख जन पत्थर के टुकड़ों को ही रत्न समझते हैं।

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  3. उपरोक्त संस्कृत सूत्र, धान के देश ब्लॉग़ से लिया है

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  4. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार ०५.०२.२०११ को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  5. सदैव स्मरण रखने योग्य विचार है यह।

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यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'