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गुरुवार, 3 मार्च 2011

आज का सद़विचार '' सहानुभूति के शब्‍द ''

धन तो वापस किया जा सकता है
परन्‍तु सहानुभूति के शब्‍द वे ऋण हैं
जिसे चुकाना मनुष्‍य की शक्ति के बाहर है ।


- सुदर्शन

13 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहा , जब मन में संताप होता है तो सहानुभूति के मिले दो बोल ही सबसे बड़ा मरहम होते हैं।

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  2. सहानभूति के शब्द कभी 'ऋण'भी हो सकते हैं ऐसा उन शब्दों का वक्ता कभी नहीं विचारता.वर्ना सहानभूति ,सहानभूति न रहकर अहसान बनकर रह जायेगी .दिल से आभार मानना ही शायद इस ऋण की अदायिगी है .
    आपका 'मनसा वाचा कर्मणा' पर हार्दिक स्वागत है .

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  3. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (05.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  4. बहुत उच्च विचार| धन्यवाद|

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  5. सच्चाई को वयां करती हुई पोस्ट .......आभार.

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  6. सुंदर विचार, सोलह आने सत्य।

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  7. सद्विचार पर प्रकाशित सभी विचार सद् ही लगे। आभार।

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यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'