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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

आज का सद़विचार '' श्रद्धा का अर्थ ''

श्रद्धा का अर्थ अंधविश्‍वास नहीं है। किसी ग्रंथ में
कुछ लिखा हुआ या किसी व्‍यक्ति का कुछ कहा हुआ
अपने अनुभव बिना सच मानना श्रद्धा नहीं है ....।


- स्‍वामी विवेकानन्‍द

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ!
    आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  2. बहुत सही कहा है..होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  3. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  4. or anubhav 3 trah se pust hota hai..anubhav se kkoi galti na ho isliyea usko bhi 3 trah se parakhna hota hao...kyoki sadak per dhup main paani dikhta hai, naav per ghar chalte dikhaye dete hai, rassi main sarp dikh jata hai, or dhyan main 0 (shuny) bhasta hai..ye sab hamare anubhav main hi aate hai or sahi nahi nahi hai,,,
    uske liye santon ne 3 kasauti banaye

    1 yukti (anpe dwara vichar ki hui yukti)
    2 shruti (ved praman)
    3 anubhuti (apne aap swam ka anubhav)

    tab hamari anubhuti jaise pust hoti or lisi prakar nahi ho sakti...

    iska matlab ye matlab ye bhi nahi ki guru or shastr jo kahe wo jhoot hai ...wo jo kahe uska satye jaan kar hamko uska anubhav karna chahiye...

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