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मंगलवार, 22 मार्च 2011

आज का सद़विचार '' उन्‍नतिशील ''

प्रसिद्ध होने का यह एक दण्‍ड है
कि मनुष्‍य को निरंतर उन्‍नतिशील
बने रहना पड़ता है .....।।


- अज्ञात

7 टिप्‍पणियां:

  1. प्रसिद्ध बरकरार रखना भी ज्रूरी है!:)

    तथ्यपूर्ण है!!

    अस्थिर आस्थाओं के ठग

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  2. उन्नतिशील रहना अगर दंड भी है तो पुरस्कार से भला ही है !

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  3. बिल्कुल सही कहा है आपने! सत्य वचन!

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  4. आपके चार-पाँच पोस्ट पढ़े। टिप्पणी केवल एक पर दे रहा हूँ। आपका प्रयास बहुत ही प्रशंसनीय है। कम से कम इस ब्लाग पर महापुरुषों की वाणी तो मिल सकती है। आपका शत-शत आभार।

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यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'