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बुधवार, 1 फरवरी 2012

आज का सद़विचार '' सद़गुण ''

सद़गुण चीथड़ों में भी 
उतना ही शोभायमान होता है 
जितना भव्‍य वेशभूषा में ...

चार्ल्‍स डिकेंस

11 टिप्पणियाँ:

  1. सदगुण सदा ही शोभायमान है...बहुत सुंदर वचन !

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  2. बहुत बढ़िया! सत्य वचन !

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  3. हां,गुण भीतर होता है। बाहरी आवरण से वह अप्रभावित रहता है।

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  4. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  6. कुछ अनुभूतियाँ इतनी गहन होती है कि उनके लिए शब्द कम ही होते हैं !

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  7. सद्गुण तो सदैव सद्गुण ही रहेगा।
    सुंदर विचार।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'