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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

आज का सद़विचार '' वाचालों को वाचाल होने दो ''

वाचालों को वाचाल होने दो !
वे इससे अधिक और कुछ नहीं जानते  !
उन्‍हें नाम, यश,धन, स्‍त्री से संतोष प्राप्‍त करने दो।

- स्‍वामी विवेकानंद

5 टिप्‍पणियां:

  1. सही है..स्वयं को देखना ही पर्याप्त है

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  2. बहुत बढ़िया .मन का और मुख का मौन उत्तम है (लेकिन मन मोहन सिंह जी की तरह नहीं ).

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