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गुरुवार, 1 मार्च 2012

आज का सद़विचार '' अपनी भूलों को स्‍वीकारना ''

अपनी भूलों को स्‍वीकारना उस झाड़ू के समान है,
जो गंदगी को साफ कर उस स्‍थान को पहले से
अधिक स्‍वच्‍छ कर देती है .............

- महात्‍मा गांधी

6 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना, शुभकामनाएँ।

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  2. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  3. अपनी भूल को स्वीकार करना ,आने वाले कई कष्टों का निवारण कर सकता है,एक भूल को छुपाने में कई और गलतियां निश्चित रूप से होंगी ,पता चलने पर इंसान अपने आप को दूसरों की आँखों में तो गिराएगा ही,स्वयं भी अपराध बोध से ग्रस्त रहेगा.

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