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मंगलवार, 13 मार्च 2012

आज का सद़विचार '' दुख और चुनौती ''

दुख को जो बोझ समझता है, उसका पतन हो जाता है, 
जो चुनौती समझकर स्‍वीकार करता है उसका ...
उत्‍कर्ष हो जाता है ... 

- आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर विचार... दुःख यदि चुनौती है तो मानव को बेहतर ही बनाएगा.

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  2. इस सम्बन्ध में मेरा मानना है
    दुःख का आना ही एक चुनौती है,जीवन में कोई भी ऐसा नहीं होगा ,जिसका जीवन में दुखों से पाला नहीं पडा होगा यह जानना सबके लिए आवश्यक है
    दुःख के समय में अपने को कैसे सुद्रढ़ बनाएं रखें,भावनाओं को कैसे नियंत्रण में रखें,मन को कैसे सुव्यस्थित रखें
    परिस्थितियों के अनुसार दुखों से लड़ना सीखें.यह सब जानने और सीखने के लिए अनुभवी और परिपक्व मनुष्य से सहायता एवं मार्गदर्शन लेना चाहिए
    दुःख के समय उत्तेजित होने या घबराने से उनका निवारण नहीं हो सकता है.

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  3. बहुत ही बेहतरीन रचना....

    मेरे ब्लॉग
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं

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