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शनिवार, 7 जुलाई 2012

आज का सद़विचार '' हाथ अनुभव से खाली ''

जो बिना ठोकर खाए मंजिल तक पहुंच जाते हैं, 
उनके हाथ अनुभव से खाली रह जाते हैं ... 

- अज्ञात

5 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा है, ठोकर की कडवी दवा पीकर ही हमें अनुभव होता है..

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  2. बहुत बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  3. मंजिल पर पहुँचने के लिए एकमात्र अनुभव ही आवश्यक नहीं है.
    स्वयं का नहीं हो तो भी दूसरों से मार्गदर्शन लेकर एवं उनके अनुभव से मंजिल पर पहुँचने का मार्ग आसान हो सकता है.
    ठोकर खा कर ही किसी को अनुभव होगा
    यह मानना या कहना उचित नहीं है.
    दूसरों की गलतियों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है
    वह भी अनुभव ही कहलायेगा

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  4. बहुत गहरी बात कह दी आपने। आभारी।
    ............
    International Bloggers Conference!

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