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सोमवार, 16 जुलाई 2012

आज का सद़विचार '' न्‍याय और नीति ''

न्‍याय और नीति लक्ष्‍मी के खिलौने हैं, 
वह जैसे चाहती है नचाती है ... 

- प्रेमचंद

2 टिप्‍पणियां:

  1. सही है आज धन का ही बोलबाला है...न्याय और नीति दिखाई नहीं देते

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  2. जिनके पास लक्ष्मी नहीं है,न्याय और नीति के रास्ते पर वही सर्वाधिक चलते देखे गए हैं।

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