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शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

आज का सद़विचार '' शत्रु और मित्र ''

थोड़े दिन रहने वाली विपत्ति अच्‍छी है क्‍योंकि 
उसी से शत्रु और मित्र की पहचान होती है ... 

- रहीम

7 टिप्‍पणियां:

  1. अतिसुन्दर!! वैसे भी शत्रु मित्र का संज्ञान होते ही विपत्ति थोडे समय ही रहती है।

    सदा जी, 'सद्विचार' का आपका यह अविरत प्रयास स्तुत्य है।

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  2. सुना है,न कोई स्थायी शत्रु होता है,न मित्र!

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  3. जीवन में उपयोगी विचार।

    रहिमन विपदा हू भली, जो थारे दिन होय,
    हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।

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  4. अच्छा सदविचार। मेरे नए पोस्ट "अतीत से वर्तमान तक का सफर पर" आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'