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शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

आज का सद़विचार 'बुराई'

हर वर्ष एक बुरी आदत को मूल से खोदकर,
फेंका जाए तो कुछ ही वर्षों में बुरे से बुरा,
व्‍यक्ति भला हो सकता है।

- सुकरात

3 टिप्‍पणियां:

  1. सदा जी,

    एक नई साहित्यिक पहल के रूप में इन्दौर से प्रकाशित हो रही पत्रिका "गुंजन" के प्रवेशांक को ब्लॉग पर लाया जा रहा है। यह पत्रिका प्रिंट माध्यम में प्रकाशित हो अंतरजाल और प्रिंट माध्यम में सेतु का कार्य करेगी।

    कृपया ब्लॉग "पत्रिकागुंजन" पर आयें और पहल को प्रोत्साहित करें। और अपनी रचनायें ब्लॉग पर प्रकाशन हेतु editor.gunjan@gmail.com पर प्रेषित करें। यह उल्लेखनीय है कि ब्लॉग पर प्रकाशित स्तरीय रचनाओं को प्रिंट माध्यम में प्रकाशित पत्रिका में स्थान दिया जा सकेगा।

    आपकी प्रतीक्षा में,

    विनम्र,

    जीतेन्द्र चौहान(संपादक)
    मुकेश कुमार तिवारी ( संपादन सहयोग_ई)

    उत्तर देंहटाएं
  2. सदा जी,
    एक नई उर्जा का संचार होता है आपके ब्लॉग पर आकर सचमुच आपका यह प्रयास सराहनीय है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर मगर हम लोग कहाँ ऐसा करते हैं बल्कि दिन दर दिन नयी बुराईयां खुद मे शामिल कर लेते हैं बहुत बदिया आभार्

    उत्तर देंहटाएं

यह सद़विचार आपको कैसा लगा अपने विचारों से जरूर अवगत करायें आभार के साथ 'सदा'